"जादू की झप्पी" बाल साहित्य--- 01)-भूमिका
दिल तो इक बच्चा है नटखट दिल...! एक बच्चा ही तो है, जो हर घड़ी हर कदम पर एक मस्त मन मौजी चंचल परिन्दे की भाँति स्वच्छन्द खुले आकाश में नए नए ख़्यालों का पुलंदा लिए अपनी लम्बी- लम्बी उड़ानें भरता रहता है और रच डालता है अपनी ही एक अलग नई दुनियाँ व नया इतिहास तथा नए नए विचारों का गुलदस्ता लिए कूद पड़ता है जीवन रूपी गहरे समुन्दर में, वक्त की पतवार को थामे , लहरों के साथ झूलता , पवन की तरह हिलोरें लेता दिल रूपी सागर के अन्तस से समेट लाता है अनमोल रत्न ... कुछ हीरे कुछ मोती और बिखेर देता है ज़िन्दगी के कोरे ,साफ-सुथरे पाक दामन पर और वो पाक दामन है हमारा भोला सा ,प्यारा सा मासूम बचपन। बचपन हम सभी की ज़िन्दगी का वो हिस्सा है जिस पर हमारा, हमारे समाज का, हमारे शहर का , हमारे राज्य का , हमारे देश का व सम्पूर्ण विश्व का भविष्य टिका हुआ है...