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या ख़ुदा बस मुझे तेरा दर चाहिए....!

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या ख़ुदा बस मुझे तेरा दर चाहिए  प्यार से सुर्ख़रू हर डगर चाहिए  हाथ ऊपर उठा जब दुआ मैं करूँ हर दुआ में अज़ब इक असर चाहिए सर झुका करके जो भी इबादत करें  उन सभी पर तेरी बस नज़र चाहिए  जिस जहाँ से परिंदे उड़ाने भरें  उस जहाँ सा मुझे इक नगर चाहिए  एक पल को भी माही जो होना जुदा  एक तुझसा मुझे हमसफर चाहिए ©डॉ० प्रतिभा 'माही'

उजालों की बात...!

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उजालों की बात...! "कुछ अंधेरों के साथ रहती हूँ यूँ उजालों की बात कहती हूँ  बनके माही में ज्वार भाटा भी   इस समंदर के साथ बहती हूँ"  ©डॉ० प्रतिभा 'माही'

"MERA KYA"

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मेरा क्या..! छोड़ दिया सब तेरे हवाले मेरा क्या  पार लगा या नाव डुबादे मेरा क्या  धरती अंबर धन दौलत सब तेरा है  जो तू चाहे दाव लगा ले मेरा क्या   डॉ. प्रतिभा "माही"