देश भक्ति मुक्तक
कलम के सिपाही उठो वीर सैनिक क़दम तुम बढ़ाओ। नये रूप में तुम नया युग सजाओ।। बना योजना तुम पलट दो ये पासा । कलम के सिपाही हुनर कुछ दिखाओ।। रो रही माँ भारती क्या बताएं क्या घटे इन पत्थरों के शहर में रो रही माँ भारती अब पत्थरों के शहर में मर गयी इन्सानित औ ज़ुर्म मुहुँ फाड़े खड़ा हो गया इंसान भी पत्थर पत्थरों के शहर में भारत' नाम बता आना उठो देश के वीर सपूतो, अपना कदम बढ़ाओ तुम भारत की रक्षा की ख़ातिर, दुश्मन से टकराओ तुम दुश्मन की करतूतों का, अच्छा सबक सिखा आना कोई नाम तुम्हारा पूछे, भारत' नाम बता आना जायें छोड़कर भारत को जो चाटें तलवे दुश्मन के, वो जायें छोड़कर भारत को। जो छेद करें खा थाली में, वो जायें छोड़कर भारत को।। बात करें क्या ग़द्दारों की, जो रोज तिजोरी भरते हैं। जो बिन पेंदी के हैं लोटे, वो जायें छोड़कर भारत को।। देश निकाला दो उनको जो भिड़वा देते आपस मे, तुम देश निकाला दो उनको। जो करें दोगली बात सदा, तुम देश निकाला दो उनको।। कर दो उनको बेपर्दा अब, जो भेष बदल कर रहते हैं। जो नौंच-नौंच खाते भारत, तुम देश निकाला दो उनको।। दीवानों की टोलियाँ आज़ादी को चली बचाने दीवानों की...