पंचकूला की धरती से..!!!

मैं हिंद राष्ट्र पर लिखती हूँ,
              उसके ही गीत सुनाती हूँ
हिन्दू है आधार जगत का, 
              सबको यह बतलाती हूँ
मैं गीत हिन्द के गाती हूं....!2

कर्मों से हैं हिंदुस्तानीऔर व्यवहार स्वदेशी है।

रहन-सहन और खान-पान सब,घर संसार स्वदेशी है ।

कसम उठाई मान रखेंगे, हम अपने संस्कारों का।मातृभूमि की खातिर अपना, जीवन सार स्वदेशी है।।


हम सबका प्यार सनातन है।
जग का आधार सनातन है।।
उस मातृभूमि को नमन मेरा...!
जहाँ कण-कण यार सनातन है...!!



द्रोणाचार्य की धरती से , शीश नवाने आई हूँ ।
हर घर में इक बीज शौर्य का, आज उगाने आई हूँ।।
चाहो तो ले लो तुम आकार, घर में पौध लगालो तुम।
दुर्गा बनकर दैत्यों का मैं , नाश कराने आई हूँ।।

पाँच  कुला की धरती से मैं, मंच सजाने आई हूँ ।
गीत ग़ज़ल मुक्तक सब लेकर, आज सुनाने आई हूँ।। खुशियों से आ, भर लो झोली,प्रीत का दीप जलालो तुम।
चुन चुन कर उल्फ़त के मोती, आज लुटाने आई हूँ।

अर्जुन बनकर युद्ध में लड़ना,
                     सुन लो बहुत जरूरी है।
हर दिल से हुंकार निकलना,
                     सुन लो बहुत जरूरी है।।
चील व कऊए गिद्ध भेड़िए, 
                     देखो बैठे ताक रहे हैं।
रणभूमि में बिगुल का बजना,
                     सुन लो बहुत जरूरी है।।
                                गीत 

राष्ट्र यज्ञ की आहुति का, बिगुल बजाने आई हूँ ।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं, याद दिलाने आई हूँ ।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं ....!

देश की खातिर खून न उबले , खून नहीं वो पानी हैं ।
रण चंडी का रूप धरे वो, नारी हिन्दुस्तानी है।
बात यही बस तुम लोगों को , आज बताने आई हूँ।
राष्ट्र यज्ञ की आहुति का, बिगुल बजाने आई हूँ ।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं, याद दिलाने आई हूँ ।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं ....!

चण्डी दुर्गा काली बनकर ,सबको सबक सिखाना है।
भरतनाट्यम कर छाती पर,ताण्डव आज दिखाना है।
गद्दारों की गद्दारी को आग लगाने आई हूँ ।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं, याद दिलाने आई हूँ ।
राष्ट्र यज्ञ की आहुति का, बिगुल बजाने आई हूँ ।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं ....!

बाँध कफ़न मैं, माँ की खातिर, शस्त्रों से श्रृंगार करूं।
पहन के भगवा, गली गली मैं , शत्रु का संहार करूं।
बरछी ढाल, कृपाण कटारी,आज चलाने आई हूं।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं, याद दिलाने आई हूँ ।
राष्ट्र यज्ञ की आहुति का, बिगुल बजाने आई हूँ ।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं ....!

अर्जुन की 'माही' बनकर मैं, गीता पुनः पढ़ा दूँगी
सार बता जीवन मृत्यु का , शूली उन्हें चढ़ा दूँगी ।
धर्म युद्ध में अधर्मियों का, होश उड़ाने आई हूँ।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं, याद दिलाने आई हूँ ।
राष्ट्र यज्ञ की आहुति का, बिगुल बजाने आई हूँ ।।
भारत माँ की, बेटी हूँ मैं ....!
आज़ादी को चली बचाने दीवानों की टोलियाँ
वीरों की माता ने कर दीं अपनी खाली झोलियाँ
फौलादी तन देकर जिनको तिलक लहू से कर भेजा 
देखो यारो खेल रहे वो खून से बैठे होलियाँ
               बंदे मातरम... बंदे मातरम...!
               बंदे मातरम... बंदे मातरम...!


घटा सी मस्त मौला हूँ , पवन के साथ बहती हूँ ।
कलम की इक सिपाही हूँ , वतन के गीत कहती हूँ।।
बरसती सिंहनी बनकर, भरूँ हुंकार शब्दों से । 
मैं भारत माँ की हूँ रक्षक, तिरंगा हाथ  गहती हूँ ।।

              बहुत जरूरी है 

अर्जुन बनकर युद्ध में लड़ना,
                      सुन लो बहुत जरूरी है।
हर दिल से हुंकार निकलना,
                      सुन लो बहुत जरूरी है।।

कट्टरपंथी हिंदू बनकर , 
                      अपना धर्म बचाओ तुम।
हर बाजी पर उत्तर रखना, 
                      सुन लो बहुत जरूरी है।।

पहन के भगवा निकल पड़ो  तुम,
                      अलख जगाओ घर घर में।
देश की खातिर रक्त उबलना, 
                      सुन लो बहुत जरूरी है ।।

चील व कऊए गिद्ध भेड़िए, 
                      देखो बैठे ताक रहे।
रणभूमि में बिगुल का बजना, 
                      सुन लो बहुत जरूरी है ।।

चुन-चुन कर अब दफन करो, 
                       जो सौदा करते  अपनों का।
उन वहशी को आज पकड़ना, 
                      सुन लो बहुत जरूरी है ।।

आगे आकर कदम बढ़ाओ , 
                     शस्त्र उठाओ हाथों में ।
हर बेटी का दुर्गा बनना , 
                     सुन लो बहुत जरूरी है।।

अर्जुन बनकर युद्ध में लड़ना,
                      सुन लो बहुत जरूरी है।
हर दिल से हुंकार निकलना,
                      सुन लो बहुत जरूरी है।।

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गीत 

हम सबका प्यार सनातन है।
जग का आधार सनातन है।।
सनातन है..!!! सनातन है...!!!
सनातन है.. है...है..!!! सनातन है...!!!

है वेदों का ज्ञान जहाँ,
होता भागवत का गान जहाँ,
गीता रामायण का होता,
घर -घर में सम्मान जहाँ,
उस मातृभूमि को नमन मेरा...!
जहाँ कण-कण यार सनातन है...!!
हम सबका प्यार सनातन है।
जग का आधार सनातन है।।
सनातन है..!!! सनातन है...!!!
सनातन है.. है...है..!!! सनातन है...!!!

धरती अम्बर औ नदियों को,
पशु पक्षी जड़ी बूटियों को,
पूजा जाता है श्रद्धा से,
पुरखों को, ऋषि मुनियों को,
जहाँ भक्ति भाव सबके मन में...!
वहाँ सूरज  चाँद सनातन हैं...!!
हम सबका प्यार सनातन है।
जग का आधार सनातन है।।
सनातन है..!!! सनातन है...!!!
सनातन है.. है...है..!!! सनातन है...!!!
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                             Muktak
उठो सनातनी शपथ उठाओ, 
               विश्व विजय परिवर्तन की।
घर घर जाकर अलख जगाओ, 
               विश्व विजय परिवर्तन की।।
भारत मां की सेवा में जुट, 
               अपना पूर्ण समर्थन दो।
गर हिंदू हो विगुल बजाओ, 
               विश्व विजय परिवर्तन की।।


         © Dr. Pratibha 'Mahi' Panchkula 

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