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खट्टा-मीठा इश्क़...! [ COMING SOON MY NEW BOOK ] प्यार भरी नज़्में (मुक्त छंद काव्य)

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                  मेरा इश्क़, ही इबादत ये शब्द डूबे, इश्क़ में,   तेरा नाम, लिख रहे हैं। हाँ आरजू में, बस तेरी ये, पैगाम , लिख रहे हैं ।। है इश्क़ फ़ितरत, में मेरी, मेरा इश्क़, ही इबादत । बस ज़िंदगी के, फ़लसफों का, अंजाम, लिख रहे हैं।।                      खट्टा-मीठा इश्क़...! भुलाए नहीं... भुलाया जा सकता...! तेरा.... खट्टा-मीठा इश्क़...! जो आगोश में भर मुझे... कर देता है मदहोश.. आज भी...!! चला आता है... मेरे ख्वाबों की गली... चुरा ले जाता है....  बिन छुए ही....  अपने आप से मुझे.... कर जाता है तन्हा... दुनिया की भरी भीड़ में...! रह जाती हूँ अकेली होकर विदेह तेरी याद में...! और क्या बताऊँ....!!! भुलाए नहीं... भुलाया जा सकता...! तेरा.... खट्टा-मीठा इश्क़...! जो आगोश में भर मुझे... कर देता है मदहोश.. आज भी...!! सुन यार... चाहे भोर का उजाला हो... या काली, अंधेरी रात का सन्नाटा...! शाम का सुनहरा आलम हो.... या चाँद की...

गजल : चुन चुन शूल पिरोता क्यूँ है

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यहाँ कर्मों की खेती है,                  जहर के बीज बोना मत। मिलेगा वो जो बोया है ,                   उसे पाकर  तू रोना मत ।। चुन-चुन शूल पिरोता क्यूँ है  माथ पकड़ फिर रोता  क्यूँ  है                      व्यसनों में रहता है डूबा                      जीवन अपना खोता  क्यूँ   है अमृत बेला जाए बीती बेच के घोड़े सोता  क्यूँ  है                       झूम रहा है अपने मद में                       बोझा इतना ढोता  क्यूँ  है पूछ रहा है 'माही' तुझसे बीज जहर के बोता  क्यूँ  है © Dr Pratibha 'Mahi' 

भारत माँ की, बेटी हूँ मैं, याद दिलाने आई हूँ ।

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मैं हिंद राष्ट्र पर लिखती हूँ,               उसके ही गीत सुनाती  हूँ । हिन्दू है आधार जगत का,                सबको यह बतलाती  हूँ मैं गीत हिन्द के गाती हूं....!2 कर्मों से हैं हिंदुस्तानी ,  और व्यवहार स्वदेशी है। रहन - सहन और खान - पान सब , घर संसार स्वदेशी है  । कसम उठाई मान रखेंगे , हम अपने संस्कारों का। मातृभूमि की खातिर अपना, जीवन सार स्वदेशी है।। हम सबका प्यार सनातन है। जग का आधार सनातन है।। उस मातृभूमि को नमन मेरा...! जहाँ कण-कण यार सनातन है...!! द्रोणाचार्य की धरती से , शीश नवाने आई हूँ । हर घर में इक बीज शौर्य का, आज उगाने आई हूँ।। चाहो तो ले लो तुम आकार, घर में पौध लगालो तुम। दुर्गा बनकर दैत्यों का मैं , नाश कराने आई हूँ।। पाँच  कुला की धरती से मैं, मंच सजाने आई हूँ । गीत ग़ज़ल मुक्तक सब लेकर, आज सुनाने आई हूँ।। खुशियों से आ, भर लो झोली,प्रीत का दीप जलालो तुम। चुन चुन कर उल्फ़त के मोती, आज लुटाने आई हूँ। अर्जुन बनकर युद्ध में ल...

अर्जुन बनकर युद्ध में लड़ना, सुन लो बहुत जरूरी है ।

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अर्जुन बनकर युद्ध में लड़ना,  सुन लो बहुत जरूरी है । हर दिल से हुंकार निकलना,  सुन लो बहुत जरूरी है ।। कट्टरपंथी हिंदू बनकर,  अपना धर्म बचाओ तुम। हर बाजी पर उत्तर रखना,  सुन लो बहुत जरूरी है ।। पहनके भगवा  निकल पड़ो तुम,  अलख जगाओ घर घर में।  देश की खातिर रक्त उबलना,  सुन लो बहुत जरूरी है ।। चील व कऊए गिद्ध भेड़िए,  देखो बैठे ताक रहे। रण भूमि में बिगुल का बजना,  सुन लो बहुत जरूरी है ।। चुन चुन कर अब दफन करो,  जो सौदा करते अपनों का। उन वहशी को आज पकड़ना,  सुन लो बहुत जरूरी है ।। आगे आकर कदम बढ़ाओ,  शस्त्र उठाओ हाथों में । हर बेटी का दुर्गा बनना ,  सुन लो बहुत जरूरी है।।

मैं गीत हिन्द के गाती हूं...

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हिंद राष्ट्र पर लिखती हूं,  उसके ही गीत सुनाती हूं। हिन्दू है आधार जगत का,  सबको यह बतलाती हूं मैं गीत हिन्द के गाती हूं....!2 हम सबका प्यार सनातन है। जग का आधार सनातन है।। है वेदों का ज्ञान जहाँ, भागवत का है गान  जहाँ , गीता रामायण का होता घर -घर में सम्मान  जहाँ उस मातृभूमि को नमन मेरा जहाँ  कण - कण यार सनातन है। हम सबका प्यार सनातन है। जग का आधार सनातन है।। धरती अम्बर औ नदियों को, पशु पक्षी जड़ी बूटियों को, पूजा जाता है श्रद्धा से, पूर्वज को ऋषि मुनियों को, है भक्ति भाव सबके मन में वो सूरज -चाँद सनातन हैं हम सबका प्यार सनातन है। जग का आधार सनातन है।। उठो सनातनी शपथ उठाओ, विश्व विजय परिवर्तन की। घर घर जाकर अलख जगाओ, विश्व विजय परिवर्तन की।। भारत मां की सेवा में जुट, अपना पूर्ण समर्थन दो। गर हिंदू हो विपुल बजाओ, विश्व विजय परिवर्तन की।। ********** करे राज हिंदुत्व हमारा, वक्त बदलना चाहिए। अगर लाल भारत माँ के हो, रक्त उबलना चाहिए।। विजय विश्व की शपत उठाओ, नाज़ करे  भारत भूमि चले विश्व पर सत्ता अपनी, तख्त पलटना चाहिए।। ********** © Dr Pratibha'Ma...

भगवा है पहचान हमारी (70) हिन्दुत्व राष्ट्र

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हिंद राष्ट्र पर लिखती हूं, उसके ही गीत सुनाती हूं। हिन्द है आधार जगत का, सबको यह बतलाती हूं मैं गीत हिन्द के गाती हूं....!2 ****** मेरा मान तिरंगा है.. मेरी शान तिरंगा है... भारत माता की, पहचान तिरंगा है....!  तिरंगा है.... तिरंगा है.... तिरंगा है.....तिरंगा है...! तिरंगा है है है..तिरंगा है... केसरिया बहता रग - रग में,  शक्ति बन भिड़ जाता है। सफेद रंग है सच्चाई का,  शांति पाठ पढ़ाता है।। हरा रंग है हरियाली का,  खेतों  में अंगड़ाता है।  और चक्र जो चलता प्रतिफल,  वक्त का भान कराता है। लहर लहर लहराए घर-घर,  गीत सुहाने गाता है। कुर्बानी ,वीर शहीदों की पल - पल याद दिलाता है।। वो आन तिरंगा है.... सम्मान तिरंगा है.... भारत माता की, पहचान तिरंगा है....!  तिरंगा है.... तिरंगा है.... तिरंगा है.....तिरंगा है...! तिरंगा है है है..तिरंगा है...                 करे राज हिंदुत्व हमारा,                            वक्त बदलना चाहिए..! ...

पुलवामा

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शत शत नमन शहीदों को करता भारत शीश झुकाकर , शत शत नमन शहीदों को अश्क़ स्वरूपी सुमन चढ़ाकर, शत शत नमन शहीदों को पुलवामा की इस घटना ने, दिल को चकना चूर किया भारत के हर शख़्स को इसने, उठने को मजबूर किया बच्चे बूढ़े नर नारी सब , उतर पड़े हैं सड़कों पर मोदी जी अब कदम उठाओ , लफ़्ज़ यही हैं होठों पर माता के हृदय से चिपके, देखो लाल सिसकते है बहना के पथराये नैना, वीर का रस्ता तकते हैं वीर शहीदों की रूह पूछे , कुछ तो बोलो मोदी जी उबल रहा है लहू हमारा , मुख तो खोलो मोदी जी आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो ह्रदय पर, उनको कौन भरेगा अब बतलाओ क्या उत्तर दे हम, अपने वीर शहीदों को करता भारत शीश झुकाकर, शत शत नमन शहीदों को शस्त्र सजाकर बैठे हैं बस, एक इशारा दे दो तुम आज मिला देंगे माटी में, बैठ नज़ारा देखो तुम अब सहन नहीं होती हमसे, ये पाकिस्तान की गद्दारी पाल रहा जो आतंकी को, करता छुपकर गोलाबारी आदेश तुम्हारा मिल जाये, तो डंका आज बजा देंगे कमजोर न समझें भारत को, ये दुनिया को समझा देंगे शीश हिलाकर मोदी जी ने, सेना को आदेश दिया ब्रह्ममहूर्त में पवनदूत को, बालकोट में भेज दिया बोले ज...