प्रेम सु नाऊं , हास्य सु नाऊं , वीरों की ललकार सुनाऊँ ..! दिल में प लता प्यार सु नाऊं , या सजता श्रृंगार सुनाऊँ ...!! कुदरत का हर रंग है यारो , हर र स की मधुशाला है..! भारत माँ के वाशिंदों की, यार कहो चीत्कार सुनाऊँ ...!! जो तुम कहदो वही सुनाऊँ ...!!! जो तुम कहदो वही सुनाऊँ ...!!! रूह से रूह का मिलन करा कर ...! रूहानी मंज़र दिखलाऊँ ...! जो तुम कहदो वही सुनाऊँ ...!! गीत-ग़ज़ल मुक्तक सब कु छ है...! कौन - कौन से रँग दिखलाऊँ ..! जो तुम कहदो वही सुनाऊँ ....!! मेरी र ब की पक्की यारी ..! मिलना हो तो मैं मिलवा ऊँ ...! जो तुम कहदो वही सुनाऊँ ...!! मैं प्रेम हूँ मैं शान्ति ...
मेरा इश्क़, ही इबादत ये शब्द डूबे, इश्क़ में, तेरा नाम, लिख रहे हैं। हाँ आरजू में, बस तेरी ये, पैगाम , लिख रहे हैं ।। है इश्क़ फ़ितरत, में मेरी, मेरा इश्क़, ही इबादत । बस ज़िंदगी के, फ़लसफों का, अंजाम, लिख रहे हैं।। खट्टा-मीठा इश्क़...! भुलाए नहीं... भुलाया जा सकता...! तेरा.... खट्टा-मीठा इश्क़...! जो आगोश में भर मुझे... कर देता है मदहोश.. आज भी...!! चला आता है... मेरे ख्वाबों की गली... चुरा ले जाता है.... बिन छुए ही.... अपने आप से मुझे.... कर जाता है तन्हा... दुनिया की भरी भीड़ में...! रह जाती हूँ अकेली होकर विदेह तेरी याद में...! और क्या बताऊँ....!!! भुलाए नहीं... भुलाया जा सकता...! तेरा.... खट्टा-मीठा इश्क़...! जो आगोश में भर मुझे... कर देता है मदहोश.. आज भी...!! सुन यार... चाहे भोर का उजाला हो... या काली, अंधेरी रात का सन्नाटा...! शाम का सुनहरा आलम हो.... या चाँद की...
बीत गया जो वक्त कभी वो , लौट न वापस आएगा ...! माटी का पुतला है तू , माटी में मिल जाएगा .....! माटी में मिल जाएगा .....! आजा मिलकर जतन करें और लोगों का उपकार करें ...! प्यार बाँट कर इस दुनिया को , प्यार भरा भंडार भरें ...! प्यार भरा भंडार भरे ...!2 जो कुछ बाँटा इस धरती पर , जन्नत में तू पाएगा ...! माटी का पुतला है तू , माटी में मिल जाएगा ....! माटी में मिल जाएगा ....! बीत गया जो वक्त कभी वो , लौट न वापस आएगा ...! आओ प्यारे पास हमारे , सच्ची बात बताते हैं ...! निर्धन निर्बल भूखे प्यासे , सबको कण्ठ लगाते हैं ...! सबको कण्ठ लगाते हैं ...! हुनर सिखाते हैं जीने का , किस्सा जन - जन गाएगा ...! माटी का पुतला है तू , माटी में मिल जाएगा ....! माटी में मिल जाएगा ....! बीत गया जो वक्त कभी वो , लौट न वापस आएगा ...! अपने कर्मों की खेती से, दिल मे ं जगह बनाले तू..! सुन ले यारा ...
बहुत सुंदर लेखन।
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