कह दो ना तुम मरते हो 【35】

ख़्वाब मेरा ही गढ़ते हो 
आना कानी करते हो 

हुस्न ग़ज़ब का है मेंरा 
क्यूँ कहने से डरते हो 

रोज़ चकोरी की छत पर
बिन मौसम ही झरते हो 

बात बनाना छोड़ो अब
कह दो ना तुम मरते हो 

धक-धक धड़के दिल 'माही' 
छुप-छुप आहें भरते हो 

© डॉ० प्रतिभा 'माही'

Comments

Popular posts from this blog

बोलो क्या सुनना चाहते हो तुम...? जो तुम कहदो वही सुनाऊं...!!! 21/03/2025

पुण्यश्लोक मातोश्रीअहिल्या बाईं होल्कर

पंचकूला की धरती से..!!!