मैं हिंद राष्ट्र पर लिखती हूँ, उसके ही गीत सुनाती हूँ । हिन्दू है आधार जगत का, सबको यह बतलाती हूँ मैं गीत हिन्द के गाती हूं....!2 कर्मों से हैं हिंदुस्तानी , और व्यवहार स्वदेशी है। रहन - सहन और खान - पान सब , घर संसार स्वदेशी है । कसम उठाई मान रखेंगे , हम अपने संस्कारों का। मातृभूमि की खातिर अपना, जीवन सार स्वदेशी है।। हम सबका प्यार सनातन है। जग का आधार सनातन है।। उस मातृभूमि को नमन मेरा...! जहाँ कण-कण यार सनातन है...!! द्रोणाचार्य की धरती से , शीश नवाने आई हूँ । हर घर में इक बीज शौर्य का, आज उगाने आई हूँ।। चाहो तो ले लो तुम आकार, घर में पौध लगालो तुम। दुर्गा बनकर दैत्यों का मैं , नाश कराने आई हूँ।। पाँच कुला की धरती से मैं, मंच सजाने आई हूँ । गीत ग़ज़ल मुक्तक सब लेकर, आज सुनाने आई हूँ।। खुशियों से आ, भर लो झोली,प्रीत का दीप जलालो तुम। चुन चुन कर उल्फ़त के मोती, आज लुटाने आई हूँ। अर्जुन बनकर युद्ध में ल...
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